इसे कहते हैं सीधी बात : कांग्रेस को उत्तराखंड की जमीन की चिंता है तो बनभूलपुरा पर रुख साफ करे : खजान दास

भाजपा ने तंज कसा कि लगता है प्रदेश कांग्रेस ने राज्य का विकास रोकने की सुपारी ली हैं, अन्यथा उनके नेता सफेद झूठ बेशर्मी से न बोलते। कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश प्रवक्ता खजान दास ने अफसोस जताया कि चुनावी लाभ के लिए वे 288 बीघे जमीन को 7000 बीघा तो बताते हैं, लेकिन अवैध धार्मिक अतिक्रमण से मुक्त 13 हजार एकड़ भूमि का विरोध करते हैं।
उन्होंने मीडिया में जारी प्रतिक्रिया में कहा कि कांग्रेस मुद्दों और विचारों को लेकर पूरी तरह दिवालिया हो गई है। तभी एक के बाद एक सफेद झूठ बड़ी बेशर्मी से फैलाने में लगे हैं। पिछले 5 वर्ष से अधिक का उनका रिकॉर्ड देखें तो नकारात्मक मुद्दों से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की है, चाहे उसके चलते प्रदेश की छवि क्यों न खराब हो जाए। वो चाहे पवित्र धामों को लेकर फैलाई अफवाह हो, पहाड़ की बेटी की दुखद हत्या पर राजनैतिक रोटियां सेकने की कोशिश हो, चाहे अफवाह फैलाकर पारदर्शी एवं ईमानदार नियुक्तियां को बाधित करना हो, चाहे डेमोग्राफी परिवर्तन की कोशिश पर कार्रवाई को प्रभावित करना हो, चाहे अशुद्धिकरण का झूठ फैलाना हो या वर्तमान ने यूआईआईडीबी को लेकर विशुद्ध अफवाह परोसना हो।
उन्होंने हैरानी जताई कि झूठ बोलने में इतना अंधे हो गए हैं कांग्रेसी नेता कि UIIDB को 7,000 बीघा भूमि दिए जाने का दावा कर रहे हैं। जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये केवल 45 एकड़ भूमि दी गई है, जो लगभग 288 बीघा के बराबर है। ये सच कांग्रेस के नेता भी जानते हैं बावजूद इसके 7,000 बीघा का आंकड़ा बोलकर सरकार और प्रदेश को बदनाम करना चाहते हैं। ताकि राज्य में हो रहा निवेश बाधित किया जाए और युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को दूर किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कांग्रेस को वास्तव में उत्तराखंड की जमीन और यहां के अधिकारों की इतनी ही चिंता है, तो उसे बनभूलपुरा के मामले पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। जिस अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई, उसके खिलाफ कांग्रेस के नेताओं और विधायकों द्वारा लगातार विरोध किया गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। आखिर ऐसा क्यों है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होते ही कांग्रेस के नेताओं के पेट में दर्द शुरू हो जाता है? कांग्रेस के शासनकाल में उत्तराखंड में अतिक्रमण लगातार बढ़ता रहा। जगह-जगह लैंड जिहाद के नाम पर अवैध मजारे बनाई गईं और अवैध मस्जिदें स्थापित की गईं, लेकिन कांग्रेस सरकारें इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहीं। वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कांग्रेस ने न केवल इन गतिविधियों की अनदेखी की, बल्कि उसके नेताओं पर इन्हें संरक्षण देने के भी आरोप लगते रहे। इसके विपरीत, भाजपा की धामी सरकार ने सत्ता में आते ही अतिक्रमण और अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू किया और अब तक 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण एवं कथित लैंड जिहाद से मुक्त कराने का काम किया है। 13 हजार एकड़ जमीन धर्म की आड़ में भूमाफियाओं द्वारा कब्जाई जमीन छुड़ाई गई, लेकिन कांग्रेस का रुख उन्हें बचाने और प्रदेश की छवि खराब करने का रहा। उत्तराखंड की जनता अब केवल आरोप नहीं, तथ्य और दस्तावेज देखती है। उसे यह भी पता है कि कौन जमीनों की रक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है और कौन कार्रवाई रुकवाने के लिए राजनीति कर रहा है। उत्तराखंड में अब उसके झूठ का भ्रम लंबे समय तक टिकने वाला नहीं है। जिस तरह चुनावी राजनीति के लिए कांग्रेस, प्रदेश की छवि को भी दांव लगाने से बाज नहीं आ रही है। उससे तो लगता है, कहीं प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने अपने आलाकमान से उत्तराखंड का विकास रोकने की सुपारी तो नहीं ले ली है?
